“भगवान छत्तीसगढ़ पुलिस की रक्षा करें” — IPS डांगी केस में सरकार पर उठे सवाल
भाजपा नेता का ट्वीट: “भगवान छत्तीसगढ़ पुलिस की रक्षा करें” — IPS डांगी केस में सरकार पर उठे सवाल
रायपुर | 25 अक्टूबर 2025 छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश कार्यालय मंत्री नरेश गुप्ता ने एक ट्वीट किया—
> “भगवान छत्तीसगढ़ पुलिस की रक्षा करें।”
पहली नज़र में यह ट्वीट साधारण प्रतीत हुआ, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस का कारण बन गया। दरअसल, ट्वीट ऐसे समय पर किया गया जब राज्य सरकार ने आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए एक समिति गठित की है। इस समिति में एक अन्य आईपीएस अधिकारी आनंद छाबड़ा को शामिल किया गया है, जिनकी नियुक्ति पर भाजपा नेता ने खुले तौर पर सवाल उठाए हैं।
गुप्ता का आरोप: “न्याय का मजाक बन गया है”
अपने ट्वीट के बाद जारी एक विस्तृत बयान में नरेश गुप्ता ने कहा—
“क्या यह न्याय का मजाक नहीं है कि जिस अधिकारी पर खुद गंभीर आरोप हैं, जिनके घर सीआईडी की छापेमारी हो चुकी है, उन्हें किसी अन्य अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न की जांच का जिम्मा सौंप दिया गया है?”
गुप्ता का इशारा आईपीएस आनंद छाबड़ा की ओर था, जो कथित तौर पर महादेव ऐप सट्टा घोटाले में सीआईडी जांच के दायरे में रहे हैं। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि छाबड़ा को 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को फायदा पहुंचाने वाले “खैरागढ़ टेम्पलेट” का मुख्य योजनाकार माना जाता है।
गुप्ता के इस बयान ने न केवल पुलिस विभाग में बल्कि सत्तारूढ़ दल के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी अधिकारी पर खुद भ्रष्टाचार या अनैतिक गतिविधियों के आरोप हों, तो क्या उन्हें किसी अन्य अधिकारी के खिलाफ जांच का जिम्मा दिया जाना नैतिक है?
सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
इस पूरे मामले ने राज्य सरकार को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है। कांग्रेस नेतृत्व वाले प्रशासन ने आईपीएस डांगी पर लगे आरोपों की जांच के लिए समिति का गठन किया था ताकि मामले में पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन समिति में आनंद छाबड़ा की मौजूदगी पर भाजपा ने अब सवाल उठाकर सरकार की मंशा पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नरेश गुप्ता का यह ट्वीट केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि सरकार के भीतर कथित "फेवरिट अफसरशाही" के खिलाफ खुला विरोध है। इससे पहले भी भाजपा नेताओं ने कई मौकों पर राज्य सरकार पर आरोप लगाए हैं कि वह पुलिस विभाग में अपने “पसंदीदा अधिकारियों” को बचाने या उन्हें रणनीतिक जिम्मेदारियां देने का काम करती है।
यौन उत्पीड़न केस से गर्म हुआ माहौल
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ पुलिस की एक अधिकारी की पत्नी ने आईपीएस रतनलाल डांगी पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद से ही राज्य पुलिस और प्रशासनिक तंत्र में हलचल मची हुई है। सरकार ने मामले की जांच के लिए समिति गठित कर दी है, लेकिन जांच टीम के गठन को लेकर अब विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया है।
भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर सरकार वास्तव में निष्पक्ष जांच चाहती है, तो उसे ऐसी समिति गठित करनी चाहिए जिसमें किसी भी सदस्य पर व्यक्तिगत या पेशेवर स्तर पर विवाद या जांच की छाया न हो।
विपक्ष को मिला मुद्दा
डांगी मामले पर भाजपा का यह पहला बड़ा राजनीतिक हमला माना जा रहा है। नरेश गुप्ता के ट्वीट के बाद अन्य भाजपा नेताओं ने भी सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना शुरू कर दी है। कई नेताओं ने इसे “पुलिस तंत्र के भीतर से विश्वास खत्म होने की शुरुआत” बताया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि सरकार ने मामले में पूरी पारदर्शिता रखी है और जांच निष्पक्ष रूप से होगी।
मायने
आईपीएस डांगी पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोप, समिति में आनंद छाबड़ा की नियुक्ति और उस पर भाजपा की आपत्ति—इन सबने मिलकर छत्तीसगढ़ की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।
नरेश गुप्ता का एक वाक्य—“भगवान छत्तीसगढ़ पुलिस की रक्षा करें”—अब राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है। यह ट्वीट न केवल सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि यह भी संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में पुलिस, सत्ता और राजनीति के रिश्ते एक बार फिर सार्वजनिक बहस का मुद्दा बनने वाले हैं।
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