The uniform is tainted, the protector वर्दी हुई दागदार रक्षक बना भक्षक बड़े पुलिस अधिकारी खासम खास सिपाही बना लुटेरा
क्राइम ब्रांच की करतूत: कारोबारी की कार से 2 लाख की लूट, सिपाही सस्पेंड – पुलिस ही जब चोर बन जाए तो जनता किससे करे भरोसा?
रायपुर/दुर्ग। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग को शर्मसार करने वाली एक घटना ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। रायपुर क्राइम ब्रांच की टीम पर कारोबारी की कार से 2 लाख रुपये चोरी करने का आरोप लगा है। शिकायत की पुष्टि के बाद एक सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ निलंबन से न्याय हो जाएगा? क्या यह मामला लूट की धाराओं में दर्ज नहीं होना चाहिए?
जानकारी के अनुसार, दुर्ग निवासी एक महिला कारोबारी ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 18 अक्टूबर की रात वह शोभा नगर, बालोद–गुंडरदेही मार्ग से लौट रही थीं, तभी रायपुर क्राइम ब्रांच की टीम ने उनका पीछा किया और जांच के नाम पर कार को रोक लिया। तलाशी के दौरान कार में रखे 2 लाख रुपये गायब हो गए।
टीम में सिपाही नितिन गोयल, प्रशांत शुक्ला और अमित बंछोर शामिल थे। जब कारोबारी ने पैसों के गायब होने की शिकायत की, तो शक सिपाही प्रशांत शुक्ला और नितिन गोयल पर गया। बाद में पूछताछ में सिपाही प्रशांत शुक्ला ने खुद माना कि उसने कारोबारी की कार से रुपये निकाले थे। इसके बाद उसे तुरंत सस्पेंड कर दिया गया।
हालांकि विभागीय जांच अभी जारी है, लेकिन यह सवाल अब भी अनुत्तरित है कि टीम दुर्ग क्षेत्र में गई ही क्यों थी। अधिकारियों का कहना है कि टीम किसी “मित्तल” नामक संदिग्ध व्यक्ति की जांच करने पहुँची थी, परंतु इस पर भी कोई ठोस जानकारी नहीं दी गई।
इस घटना ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसएसपी रायपुर लाल सिंह ने स्वीकार किया है कि मामले की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पैसे वास्तव में कारोबारी की गाड़ी से ही निकाले गए थे। मगर इस कार्रवाई के बावजूद लोगों में गहरा असंतोष है कि लूट का अपराध करने वाले सिपाही पर केवल विभागीय कार्रवाई क्यों की जा रही है, एफआईआर क्यों नहीं दर्ज की गई?
स्थानीय लोगों और व्यापारिक वर्ग में गुस्सा है। एक व्यापारी ने कहा, “अब पुलिस ही जब चोर बन जाए, तो जनता किससे न्याय की उम्मीद रखे?”
मामले को लेकर यह भी खुलासा हुआ है कि सस्पेंड सिपाही प्रशांत शुक्ला पहले भी विवादों में रह चुका है। वह रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा के करीबी बताए जाते हैं। इस वजह से यह आरोप लग रहे हैं कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
विपक्षी दलों ने इस प्रकरण पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि जब पुलिस अधिकारी सत्ता के संरक्षण में मनमानी करेंगे, तो प्रदेश में कानून-व्यवस्था का क्या हाल होगा। “सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का” – यह कहावत आज चरितार्थ होती दिख रही है।
गौरतलब है कि घटना उसी इलाके में हुई है, जहां मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और कई बड़े मंत्रियों के आवास स्थित हैं। इस वजह से घटना को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब राजधानी के समीप ऐसी लूट पुलिस की वर्दी में हो सकती है, तो आम जनता कैसे सुरक्षित महसूस करेगी।
यह मामला उस समय सामने आया है जब 31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर दौरे पर आने वाले हैं। ऐसे में प्रदेश की पुलिस पर लगे इस दाग ने सरकार को भी असहज स्थिति में डाल दिया है।
अब यह देखना बाकी है कि मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक इस प्रकरण में क्या सख्त कदम उठाते हैं। जनता चाहती है कि दोषी सिपाही पर लूट की धाराओं में आपराधिक मामला दर्ज हो और ऐसे मामलों में शून्य सहनशीलता नीति अपनाई जाए।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो समाज का संतुलन डगमगाने लगता है। जनता अब उम्मीद कर रही है कि इस बार मामला सिर्फ “सस्पेंशन” पर खत्म न हो, बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करने वाली सख्त कार्रवाई की जाए — ताकि पुलिस पर से उठता भरोसा फिर बहाल हो सके।
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