रायपुर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी पर अस्पतालों से मासिक वसूली और कमीशनखोरी के आरोप

Serious questions raised regarding Raipur’s healthcare system: CMHO Dr. Mithilesh Chaudhary accused of collecting monthly payments and taking commissions from hospitals.
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रायपुर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी पर अस्पतालों से मासिक वसूली और कमीशनखोरी के आरोप

रायपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल: CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी पर अस्पतालों से मासिक वसूली और कमीशनखोरी के आरोप

नर्सिंग होम एक्ट की अनदेखी, अस्पतालों में नियमों की कथित धज्जियां और आयुष्मान योजना में अनियमितताओं को लेकर CMHO की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की चुप्पी पर भी सवाल।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की होती है, लेकिन राजधानी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. मिथिलेश चौधरी की कार्यप्रणाली को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि राजधानी के कई निजी अस्पतालों में नर्सिंग होम एक्ट सहित आवश्यक नियमों का पालन नहीं हो रहा है, इसके बावजूद संबंधित अस्पतालों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय कथित तौर पर उनसे हर महीने मोटी रकम वसूली जा रही है।

राजधानी के कई निजी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कहीं संकरी गलियों में अस्पताल संचालित हो रहे हैं, तो कहीं मरीजों के आने-जाने और आपातकालीन स्थिति में फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंचने तक के पर्याप्त रास्ते नहीं हैं। अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा, आवश्यक व्यवस्थाओं और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। सवाल यह है कि जब इन अस्पतालों में कथित अनियमितताएं मौजूद हैं, तो स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण टीम इन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही है?

आरोप है कि अस्पतालों की इन्हीं कमियों को कार्रवाई का आधार बनाने के बजाय कथित वसूली का जरिया बना लिया गया है। यदि अस्पतालों में नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। लेकिन यदि कार्रवाई के बजाय आर्थिक लेनदेन को प्राथमिकता दी जा रही है, तो इसका सीधा नुकसान मरीजों और उनके परिजनों को उठाना पड़ सकता है।

आयुष्मान योजना में भी कमीशनखोरी के आरोप

स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे गंभीर सवाल आयुष्मान भारत योजना को लेकर उठ रहे हैं। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कुछ निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत होने वाले भुगतान और उपचार से संबंधित कथित अनियमितताओं में विभागीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका है। सूत्रों के अनुसार, अस्पतालों से 20 प्रतिशत तक कमीशन लिए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और दस्तावेजी पुष्टि होना अभी बाकी है।

आयुष्मान योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को आर्थिक बोझ से राहत देना है। ऐसे में यदि योजना के नाम पर किसी भी स्तर पर कमीशनखोरी या अवैध वसूली हो रही है, तो यह योजना की मूल भावना के खिलाफ है।

हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच वसूली का दावा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉ. मिथिलेश चौधरी की टीम में भूपेंद्र निर्मलकर अभिषेक सिंह और सूरज चंद्राकर नाम के तीन संविदा कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि इन तीनों कर्मचारियों को कथित तौर पर अस्पतालों से मासिक रकम एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई है।

सूत्रों का दावा है कि प्रत्येक महीने की 1 से 5 तारीख के बीच अलग-अलग अस्पतालों से कथित तौर पर तय की गई रकम एकत्र की जाती है और इसके बाद यह राशि CMHO तक पहुंचाई जाती है। आरोप यह भी हैं कि इस कथित लेनदेन में रकम का बंटवारा होता है और कुछ हिस्सा उच्च स्तर तक पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है।

हालांकि, इस पूरे कथित नेटवर्क और लेनदेन की जांच होना आवश्यक है। संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविकता सामने आ सकती है।

अस्पतालों की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे मरीज

यदि अस्पतालों में नियमों का पालन नहीं कराया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से निगरानी में लापरवाही बरती जाएगी, तो इसका खामियाजा आम मरीजों को भुगतना पड़ेगा। प्रदेश में समय-समय पर इलाज में लापरवाही, मरीजों की मौत और अस्पतालों द्वारा मृतक के शव को परिजनों को सौंपने में कथित आनाकानी जैसे मामले सामने आते रहे हैं। कई मामलों में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की शिकायतें भी उठती हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि अस्पतालों के संचालन में नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, यदि उन्हीं की भूमिका सवालों के घेरे में आ जाए तो मरीजों को न्याय कैसे मिलेगा?

EOW में शिकायत और पुराने मामलों को लेकर भी सवाल

डॉ. मिथिलेश चौधरी की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। उनके पूर्व पदस्थापना स्थल राजनांदगांव में कथित भ्रष्टाचार, अवैध संपत्ति अर्जित करने और भर्तियों में अनियमितताओं से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया जा रहा है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) में शिकायत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच और शिकायतों पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है। यदि शिकायतों में तथ्य हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की जवाबदेही पर सवाल

प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के पास है। ऐसे में राजधानी के CMHO की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार गंभीर आरोप उठ रहे हैं, तो विभागीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है? क्या स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों के निरीक्षण, नर्सिंग होम एक्ट के पालन और आयुष्मान योजना से जुड़ी शिकायतों की जांच कराई है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि राजधानी के अस्पतालों में इतनी अनियमितताएं हैं, तो उनकी निगरानी करने वाला विभाग क्या कर रहा है? क्या इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी या मामला केवल शिकायतों और आरोपों तक ही सीमित रह जाएगा?

अब जरूरत है कि रायपुर के निजी अस्पतालों में नर्सिंग होम एक्ट, अग्नि सुरक्षा और अन्य निर्धारित मानकों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। आयुष्मान योजना में कथित कमीशनखोरी, मासिक वसूली और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो। आखिर मरीजों की जिंदगी से जुड़े स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही कब सुनिश्चित होगी?

डॉ मिथलेश चौधरी की भ्रष्टाचार की अनगिनत कहानियां  लगातार।

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