Contractors express anger over slow निर्माण कार्यों में सुस्ती पर ठेकेदारों का फूटा गुस्सा, विभागीय समीक्षा बैठकों पर भी उठाए सवाल

निर्माण कार्यों में सुस्ती पर ठेकेदारों का फूटा गुस्सा, विभागीय समीक्षा बैठकों पर भी उठाए सवाल
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Contractors express anger over slow निर्माण कार्यों में सुस्ती पर ठेकेदारों का फूटा गुस्सा, विभागीय समीक्षा बैठकों पर भी उठाए सवाल

निर्माण कार्यों में सुस्ती पर ठेकेदारों का फूटा गुस्सा, विभागीय समीक्षा बैठकों पर भी उठाए सवाल

बिल भुगतान में देरी से अटक रहे विकास कार्य, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी निर्माण कार्यों की रफ्तार लगातार धीमी पड़ रही है। समयसीमा में कार्य पूरे न होने, निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा न होने, विभागीय अधिकारियों की उदासीनता और बजट की कमी जैसे कारणों से परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं। इस स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने विभागीय अफसरों को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि राज्यभर में निर्माण कार्यों में विलंब का सबसे बड़ा कारण बिल भुगतान में अव्यवस्था और पेमेंट रोकने की नीति है।

बिल भुगतान में देरी से ठप हो रहे काम

एसोसिएशन के मुताबिक वर्ष 2023-24 में पूरे हो चुके निर्माण कार्यों के करोड़ों रुपए के बिल विभाग भुगतान नहीं कर रहा है। यही हाल 2024-25 के बिलों का भी है। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग समीक्षा बैठकों में कार्यों की प्रगति बढ़ाने की बातें कर सरकार को गुमराह कर रहा है, जबकि हकीकत यह है कि जब भुगतान ही नहीं होगा, तो तेज़ी कैसे आएगी?

प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि बिना पेमेंट के किसी भी निर्माण कार्य की रफ्तार बढ़ाना संभव नहीं है। बिल भुगतान बंद होने से छोटे और मध्यम श्रेणी के कांट्रैक्टर—खासकर सी और डी श्रेणी—सबसे अधिक प्रभावित हैं। ये ठेकेदार आमतौर पर 5 से 10 करोड़ तक के कार्य लेते हैं और वित्तीय दबाव झेलने की स्थिति में नहीं होते।

प्रमुख अभियंता पर गंभीर आरोप

एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी के कामकाज की वजह से हालात बिगड़े हैं। शुक्ला का कहना है कि भतपहरी को पहले भी “कार्यशैली” के कारण मंत्रालय में ओएसडी के तौर पर अटैच किया गया था, लेकिन उन्हें दोबारा प्रमुख अभियंता बना दिया गया।

उनके पदस्थापना के बाद से—

डिवीजनों से भेजे गए बिल रोके जा रहे हैं,

बिलों का भुगतान लंबित है,

और डिमांड पोर्टल तक बंद कर दिया गया है।

पीडब्ल्यूडी में ही करीब 200 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। शुक्ला का आरोप है कि विभाग के उच्च अधिकारियों को भी जमीनी सच्चाई से गुमराह किया जा रहा है जिसके कारण समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

विभागीय समीक्षा बैठकों पर सवाल

हाल ही में लोक निर्माण विभाग के सचिव कमलप्रीत सिंह ने मंत्रालय में बैठक लेकर प्रदेश के सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं को निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसी तरह उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी समीक्षा बैठक में विकास कार्यों को गति देने की बात कही थी।

लेकिन एसोसिएशन का कहना है कि ये सभी बैठकें औपचारिकताएं बनकर रह गई हैं, क्योंकि जमीनी समस्या — बिल भुगतान — सभी दावों को ध्वस्त कर देती है।

ठेकेदारों का कहना है कि जब तक बिलों पर त्वरित कार्रवाई नहीं होगी, तब तक न तो निर्माण कार्यों में सुधार आएगा और न ही सरकार की विकास योजनाओं में अपेक्षित गति दिखाई देगी।

जल्द होगी उपमुख्यमंत्री से शिकायत

बीरेश शुक्ला ने कहा कि एसोसिएशन जल्द ही उपमुख्यमंत्री अरुण साव से मुलाकात कर प्रमुख अभियंता एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग करेगा। उनका कहना है कि सरकार की मंशा विकास कार्यों को गति देने की है, लेकिन विभागीय अधिकारियों की त्रुटियों के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।

मायने 

छत्तीसगढ़ के निर्माण विभागों में चल रही अव्यवस्था और बिल भुगतान में देरी ने विकास कार्यों की गति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ठेकेदारों का स्पष्ट कहना है कि जब तक भुगतान व्यवस्था पारदर्शी और समयबद्ध नहीं होगी, किसी भी प्रकार की समीक्षा बैठक या निर्देश प्रभावी साबित नहीं होंगे। अब गेंद सरकार और विभाग के पाले में है कि वे इस समस्या का समाधान कर निर्माण कार्यों को पटरी पर लाएं।

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