छत्तीसगढ़ में 51,080 करोड़ की रेल परियोजनाओं पर काम जारी, नए कॉरिडोर से उद्योगों और आदिवासी अंचलों को मिलेगी रफ्तार

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छत्तीसगढ़ में 51,080 करोड़ की रेल परियोजनाओं पर काम जारी, नए कॉरिडोर से उद्योगों और आदिवासी अंचलों को मिलेगी रफ्तार

छत्तीसगढ़ में 51,080 करोड़ की रेल परियोजनाओं पर काम जारी, नए कॉरिडोर से उद्योगों और आदिवासी अंचलों को मिलेगी रफ्तार

रेल नेटवर्क के विस्तार से बदलेगी प्रदेश की कनेक्टिविटी, 7,470 करोड़ रुपये का रेल बजट आवंटन; 32 रेलवे स्टेशनों का भी हो रहा आधुनिकीकरण

रायपुर, 19 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार और रेलवे अधोसंरचना के आधुनिकीकरण से प्रदेश की कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में राज्य में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी है। नई रेल लाइनें, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण से औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को गति देने की योजना है। खास तौर पर बस्तर और उत्तर छत्तीसगढ़ के उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, जहां अभी रेल सुविधाएं सीमित हैं।

रेलवे नेटवर्क का विस्तार छत्तीसगढ़ के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य देश के प्रमुख खनिज उत्पादक और औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल है। बेहतर रेल संपर्क से कोयला, लौह अयस्क, इस्पात और सीमेंट जैसे उत्पादों की ढुलाई आसान हो सकती है। इससे उद्योगों की परिवहन लागत कम करने, निवेश को प्रोत्साहित करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।

रेलवे बजट में करीब 24 गुना बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। नई रेल परियोजनाओं, दोहरीकरण, विद्युतीकरण और आधुनिक यात्री सुविधाओं के विकास से प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा मिलेगी।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए छत्तीसगढ़ को रेलवे बजट में 7,470 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह राशि वर्ष 2009-14 के दौरान राज्य को मिलने वाले औसतन 311 करोड़ रुपये सालाना आवंटन की तुलना में करीब 24 गुना अधिक है। इस निवेश का उद्देश्य व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करना, औद्योगिक एवं खनिज माल की आवाजाही बढ़ाना और रेल सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों तक संपर्क का विस्तार करना है।

खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा कॉरिडोर से माल ढुलाई को मिलेगी गति

छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर शामिल है। लगभग 278 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित कॉरिडोर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अप्रैल 2025 में मंजूरी दी थी। शुरुआत में इसकी अनुमानित लागत 8,741 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में संशोधित कर 7,854 करोड़ रुपये किया गया।

इस परियोजना का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों को बाईपास करते हुए माल एवं यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे कोलकाता-मुंबई रेल मार्ग पर परिचालन का दबाव कम करने और बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर रेल संपर्क देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

कॉरिडोर के विकसित होने से कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों के लिए माल परिवहन की क्षमता बढ़ सकती है। साथ ही, सड़क मार्ग पर निर्भरता कम होने और मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होने से औद्योगिक इकाइयों को बाजारों तक उत्पाद पहुंचाने में सहूलियत मिलेगी।

बस्तर में रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर

रेल नेटवर्क का विस्तार बस्तर क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन की लंबाई लगभग 140 किलोमीटर है और इसके लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं किरंदुल-कोत्तागुडेम रेल लाइन के करीब 180 किलोमीटर लंबे प्रस्ताव तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) की लगभग 490 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना के सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी है।

दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के तहत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक लगभग 77 किलोमीटर रेलखंड पर सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों को रेल यात्रा की सुविधा मिली है। परियोजना के अगले चरण में रावघाट तक रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इस रेल लाइन के पूरा होने पर रावघाट क्षेत्र की लौह अयस्क खदानों को भिलाई इस्पात संयंत्र से सीधे जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे कच्चे माल की ढुलाई आसान होने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।

इसके अलावा, कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल एवं यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिली है। बेहतर रेल संपर्क से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की आवाजाही, व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

कटघोरा से डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित नई रेल लाइन

छत्तीसगढ़ में कटघोरा से डोंगरगढ़ तक लगभग 295 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन विकसित करने की योजना भी प्रस्तावित है। यह रेल मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है।

इस परियोजना को रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की योजना है। इसके लिए विशेष प्रयोजन कंपनी यानी स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) गठित करने का प्रस्ताव है।

इस रेल लाइन का प्रमुख उद्देश्य उन क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ना है, जहां अभी रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। परियोजना आगे बढ़ने पर यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, यह परियोजना प्रस्तावित है और इसके विकास की दिशा में आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

उत्तर छत्तीसगढ़ में भी रेल विस्तार की तैयारी

उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लिए भी कई रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इनमें सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर रेल लाइन (244 किलोमीटर), धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल लाइन (301 किलोमीटर) और अंबिकापुर-बरवाडीह रेल लाइन (200 किलोमीटर) शामिल हैं।

इन परियोजनाओं को रेल मंत्रालय से मंजूरी मिलने की दिशा में पहल किए जाने की जानकारी दी गई है। अगस्त 2026 में इन प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लेने और सर्वेक्षण प्रक्रिया तेज करने का मुद्दा उठाया गया था।

यदि इन परियोजनाओं को मंजूरी मिलती है और निर्माण आगे बढ़ता है, तो उत्तर छत्तीसगढ़ सहित सीमावर्ती इलाकों में रेल संपर्क मजबूत हो सकता है। इससे खनिज परिवहन, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

32 रेलवे स्टेशनों का 1,680 करोड़ रुपये से होगा विकास

नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को लगभग 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है।

इस योजना के अंतर्गत स्टेशन परिसरों को अधिक व्यवस्थित बनाने, यात्रियों के लिए बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं और आधुनिक यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर है। इन सुधारों से यात्रियों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक रेल यात्रा का अनुभव मिलने की उम्मीद है।

अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत चांपा, बालोद और सरोना रेलवे स्टेशनों का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण भी प्रदेश में रेल सुविधाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का मजबूत आधार है। चांपा, बालोद और सरोना जैसे स्टेशनों के उन्नयन से स्थानीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। इससे लोगों की आवाजाही सुगम होने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

औद्योगिक विकास और रोजगार को मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का विस्तार केवल परिवहन सुविधाओं तक सीमित नहीं है। बेहतर रेल संपर्क से उद्योगों को कच्चा माल पहुंचाने और तैयार उत्पादों को बाजार तक ले जाने में सुविधा मिल सकती है। किसानों को कृषि उत्पादों के परिवहन के बेहतर विकल्प मिलेंगे, जबकि पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है।

विशेष रूप से बस्तर और उत्तर छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में रेल संपर्क का विस्तार क्षेत्रीय असमानता कम करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्रदेश में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर जारी काम, नए कॉरिडोर की योजनाएं और रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण छत्तीसगढ़ की परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक लाभ उनकी समयबद्ध पूर्णता, प्रभावी क्रियान्वयन और यात्री एवं माल परिवहन सेवाओं के विस्तार पर निर्भर करेगा।

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