रायपुर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी का जलवा! तीन लग्जरी सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से भी ज्यादा काफिले का शौक?

Raipur CMHO Dr. Mithilesh Chaudhary’s grand style! Questions raised over his use of three luxury government vehicles—does he have a penchant for an even larger convoy than the Health Minister himself?
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रायपुर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी का जलवा! तीन लग्जरी सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से भी ज्यादा काफिले का शौक?

रायपुर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी का जलवा! तीन लग्जरी सरकारी गाड़ियों के इस्तेमाल पर उठे सवाल, स्वास्थ्य मंत्री से भी ज्यादा काफिले का शौक?

सरकारी वाहनों के निजी और पारिवारिक उपयोग का आरोप, पेट्रोल-डीजल व मेंटेनेंस पर जनता के टैक्स का पैसा खर्च होने का दावा; आयुष्मान योजना, भर्ती और संपत्ति को लेकर भी शिकायतें, जांच और कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि साहब का जलवा ऐसा है कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल भी उनके सामने फीके नजर आते हैं। इसकी वजह बताई जा रही है तीन लग्जरी वाहनों का इस्तेमाल। सवाल यह है कि आखिर एक CMHO को तीन-तीन गाड़ियों की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या सरकारी वाहनों का इस्तेमाल निजी और पारिवारिक कामों के लिए किया जा रहा है? अगर ऐसा है, तो इन वाहनों के रखरखाव, पेट्रोल-डीजल और मेंटेनेंस पर खर्च होने वाले जनता के पैसे की जिम्मेदारी कौन लेगा?

तीन सरकारी गाड़ियां, आखिर किस काम के लिए?

डॉ. मिथिलेश चौधरी के इस्तेमाल से जोड़े जा रहे वाहनों के नंबर CG02 A 2580 (होंडा अमेज), CG02 AU 0882 (मारुति विक्टोरियस) और CG02 AU 3287 बताए जा रहे हैं। इन तीनों वाहनों के उपयोग को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि इनका इस्तेमाल केवल विभागीय कामों के लिए ही नहीं, बल्कि निजी और पारिवारिक कामों में भी किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल जब किसी कार्यक्रम या दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ सरकारी वाहन और काफिला दिखाई देता है। वहीं, रायपुर CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी के पास तीन-तीन लग्जरी गाड़ियों के इस्तेमाल की बात सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर एक अधिकारी को इतने वाहनों की जरूरत क्यों है?

किसी मंत्री की तरह गाड़ियों का काफिला लेकर चलने की चाहत है या फिर सरकारी वाहनों के इस्तेमाल को लेकर नियमों की अनदेखी हो रही है? यह जांच का विषय है। सरकारी पद पर बैठे अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए कि सरकारी संसाधनों के रखरखाव और संचालन पर खर्च होने वाला पैसा आम जनता के टैक्स से आता है।

पत्नी के आने-जाने में भी सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल का आरोप

बताया जा रहा है कि CMHO डॉ. मिथिलेश चौधरी की पत्नी के आने-जाने के लिए भी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल किया जाता है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि सरकारी वाहन उनकी पत्नी को मार्केट और उस स्थान तक छोड़ने जाता है, जहां वे नौकरी करती हैं।

यदि सरकारी वाहन का इस्तेमाल इस तरह निजी और पारिवारिक कार्यों के लिए किया जा रहा है, तो सवाल उठना लाजिमी है कि क्या यह सरकारी नियमों के अनुरूप है? क्या सरकारी वाहनों के उपयोग का कोई रिकॉर्ड रखा जा रहा है? इन वाहनों पर होने वाले पेट्रोल-डीजल और रखरखाव के खर्च की जांच कौन करेगा?

इन आरोपों की स्वतंत्र जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी वाहनों का उपयोग निर्धारित नियमों के तहत हो रहा है या नहीं।

आयुष्मान कार्ड, पेट्रोल-डीजल और भर्ती को लेकर भी आरोप

डॉ. मिथिलेश चौधरी को लेकर केवल सरकारी वाहनों के इस्तेमाल का मामला ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग में कथित अनियमितताओं को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोपों में आयुष्मान कार्ड योजना, पेट्रोल-डीजल के खर्च और कर्मचारी भर्ती से जुड़े मामले शामिल बताए जा रहे हैं।

इन मामलों में क्या अनियमितताएं हुई हैं, किसकी जिम्मेदारी तय होती है और विभागीय स्तर पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है, यह सामने आना जरूरी है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और विभागीय निर्णयों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।

राजनांदगांव से रायपुर तक बेनामी संपत्तियों के आरोप

डॉ. मिथिलेश चौधरी पर आय से अधिक संपत्ति और कथित बेनामी संपत्तियां बनाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं के दावों के अनुसार, राजनांदगांव से लेकर रायपुर तक अलग-अलग लोगों और परिवार से जुड़े नामों पर करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदे जाने की शिकायत की गई है।

आरोपों में रायपुर की रिहायशी कॉलोनियों में बड़े फ्लैट और बंगले, राजनांदगांव में डायग्नोस्टिक सेंटर और एक अस्पताल तथा मानपुर-मोहला क्षेत्र में पैथोलॉजी सेंटर खोलने की बात भी शामिल है।

शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इन संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों की जांच होनी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निवेश के स्रोत क्या हैं और संबंधित संपत्तियां वैध आय से खरीदी गई हैं या नहीं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और सक्षम जांच एजेंसी की जांच के बाद ही हो सकती है।

एंटी करप्शन और EOW में शिकायतों का दावा

बताया जा रहा है कि डॉ. मिथिलेश चौधरी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और संपत्तियों के मामलों को लेकर समाजसेवियों तथा विभिन्न संगठनों की ओर से एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) में शिकायतें की गई हैं।

अब सवाल यह है कि इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई? क्या शिकायतों की जांच शुरू हुई है? यदि जांच चल रही है, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? और यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कब कार्रवाई होगी?

इन सवालों पर संबंधित एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।

बड़े नेताओं से नजदीकी बताकर रौब जमाने का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि डॉ. मिथिलेश चौधरी बड़े नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह तथा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से नजदीकी होने की बात कहकर अपना प्रभाव दिखाते हैं। हालांकि, इस कथित राजनीतिक संरक्षण के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यही वजह है कि सवाल उठ रहे हैं कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ लगातार शिकायतें की जा रही हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक क्यों नहीं होनी चाहिए? किसी अधिकारी की राजनीतिक पहुंच के दावे से अलग, उसके कामकाज और सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल की जांच नियमों के अनुसार होनी चाहिए।

अस्पतालों से अवैध वसूली का भी आरोप

राजधानी रायपुर के अस्पतालों को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अस्पतालों से कथित रूप से अवैध वसूली की जाती है। शिकायतों में दावा किया जा रहा है कि वसूली के लिए दो लोगों को लगाया गया है और इस कथित रकम का एक हिस्सा CMHO तक पहुंचता है, जबकि दूसरा हिस्सा ऊपर तक पहुंचाने का दावा किया जाता है।

इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित अस्पताल संचालकों के बयान, भुगतान संबंधी साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों की जांच जरूरी है। यदि ऐसी वसूली हो रही है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों के हितों से जुड़ा गंभीर मामला होगा। हालांकि, उपलब्ध आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति की संलिप्तता को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से सवाल

रायपुर की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। ऐसे में विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ सरकारी वाहनों के कथित दुरुपयोग, संपत्तियों, भर्ती, आयुष्मान योजना और अस्पतालों से वसूली जैसे आरोप सामने आने पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से सवाल है कि डॉ. मिथिलेश चौधरी से जुड़े आरोपों और शिकायतों की जांच की स्थिति क्या है? क्या सरकारी वाहनों के इस्तेमाल की जांच कराई जाएगी? क्या कथित संपत्तियों के स्रोत की पड़ताल होगी? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी?

आखिर सरकारी पद जनता की सेवा के लिए होता है, न कि सरकारी संसाधनों को निजी सुविधाओं की तरह इस्तेमाल करने के लिए। यदि सरकारी गाड़ियों का निजी कामों में दुरुपयोग हो रहा है, तो इसकी जांच होनी चाहिए और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

नोट-यह खबर पूरे सबूत के साथ लिखा जा रहा है!

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